
”यार, मेरा बच्चा रातभर सोता ही नहीं है… आज फिर पूरी आँखें खुली रह गईं!”
अगर आप भी रात के 3 बजे उठकर यह आर्टिकल पढ़ रही हैं, तो यकीन मानिए, आप अकेली नहीं हैं। मैं समझ सकती हूँ कि इस वक्त आपके शरीर में कितनी थकान होगी और आँखें नींद से लाल हो रही होंगी। जब नन्हा मेहमान घर में आता है, तो उसकी एक मुस्कान पर हम सब कुछ भूल जाते हैं। लेकिन सच मानिए, जब वही बच्चा रात के सन्नाटे में बार-बार रोने लगता है, तो अच्छे-अच्छों का सब्र जवाब दे जाता है।
आइए, आज बिल्कुल आम भाषा में बैठकर बात करते हैं कि आखिर ये छोटे बच्चे रात में इतना क्यों परेशान करते हैं और इस चक्कर में हम यानी मम्मियां अपनी सेहत का क्या हाल कर बैठती हैं।
अरे भाई, आखिर रात में ये बच्चे रोते क्यों हैं?
ज़रा सोचिए, वो बोलकर तो बता नहीं सकते कि उन्हें क्या तकलीफ है! इसलिए उनके रोने के पीछे बस ये छोटी-छोटी वजहें होती हैं:
- पेट में चूहे कूद रहे हैं (भूख): छोटे बच्चों का पेट बहुत नन्हा सा होता है, इसलिए वे जल्दी-जल्दी भूखे हो जाते हैं। कई बार उनका ग्रोथ पीरियड चल रहा होता है, जिसमें उन्हें रात में ज्यादा दूध चाहिए होता है।
- गैस या पेट दर्द (Colic & Gas): दूध पिलाने के बाद अगर हमने ठीक से डकार नहीं दिलाई, तो वो गैस उनके पेट में दर्द करती है और बेचारा बच्चा रातभर मचलता रहता है।
- गीला डायपर: सोचिए, अगर हम खुद गीले कपड़ों में रहें तो नींद आएगी क्या? बच्चे को भी गीले डायपर की ठंडक या रैशेज की वजह से चैन नहीं मिलता।
- बहुत ज्यादा थक जाना (Overtiredness): दिनभर घर के शोरगुल या मेहमानों के चक्कर में अगर बच्चा ठीक से नहीं सोया है, तो ओवर-टायर्ड होकर वह रात में और ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाता है और जल्दी सोता ही नहीं है।
- कमरे का तापमान: कमरा बहुत ज्यादा गर्म या ठंडा तो नहीं है? बच्चे बहुत सेंसिटिव होते हैं, उन्हें मौसम का असर तुरंत होता है।
और इस सबके चक्कर में हम मम्मियों की सेहत का क्या होता है? जरा ये भी तो सोचिए!
सब लोग आकर बच्चे को तो देख लेते हैं, पर क्या कोई पूछता है कि माँ का क्या हाल है? सच कहूँ तो, इस लगातार जगने का हम पर बहुत बुरा असर पड़ता है:
- नींद की ऐसी-की-तैसी (Sleep Deprivation): हर दो घंटे पर उठना यानी दिमाग और शरीर को आराम का एक सेकंड भी न मिलना। सुबह उठते ही ऐसा लगता है जैसे सिर पर कोई हथौड़ा मार रहा हो और पूरे शरीर में जान ही न बची हो।
- बॉडी रिकवरी रुक जाती है: डिलीवरी के बाद हमारे शरीर को अंदर से ठीक होने के लिए गहरी नींद की सख्त जरूरत होती है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो कमर दर्द, जोड़ों का दर्द और कमजोरी हमारा पीछा ही नहीं छोड़ती।
- दिमाग का दही और गिल्ट: थकान की वजह से कई बार हम बिना बात के चिड़चिड़ा जाती हैं। और फिर खुद पर ही गुस्सा आता है कि “मैं अपने बच्चे को चुप क्यों नहीं करा पा रही?” यह गिल्ट अंदर से और ज्यादा थका देता है।
- हॉर्मोन का खेल: अरे भई, नींद पूरी न हो तो हॉर्मोन्स तो बिगड़ेंगे ही! इसका असर हमारे दूध बनने की क्षमता पर भी पड़ता है और वजन भी बढ़ने-घटने लगता है।
तो फिर इस रात वाली मुसीबत से निपटें कैसे? कुछ उपाय अपनाकर देखते हैं!
चलो मान लिया कि बच्चा परेशान कर रहा है, पर हमें हार नहीं माननी है। खुद को संभालने के लिए हम ये छोटे-छोटे कदम उठा सकते हैं:
- दूध पिलाने के बाद डकार ज़रूर दिलाएं: फीड कराने के बाद थोड़ी सी मेहनत करके बच्चे को कंधे से लगाएं और पीठ थपथपाएं। यकीन मानिए, गैस पास हो गई तो बच्चा चैन से सोएगा।
- रात का एक प्यारा सा माहौल बनाएं: सोने से पहले कमरे की लाइट डिम कर दें, थोड़ा शांति रखें और हल्के हाथों से गुनगुने तेल से मालिश कर दें। बच्चे को समझ आ जाएगा कि अब सोने का टाइम हो गया है।
- ‘जब बच्चा सोए, तुम भी सो जाओ’ वाला उसूल अपनाओ: मैं जानती हूँ कि जब बच्चा सोता है, तो हम सोचते हैं कि चलो बर्तन धो लूँ या कपड़े समेट लूँ। अरे छोड़िए उन कामों को! जब बच्चा सोए, आप भी बेड पर लेट जाओ और कम से कम एक झपकी ज़रूर ले लो।
- डॉक्टर की सलाह से कोलिक पेन की सिरप पास रखें: कई बार बच्चा गैस या पेट दर्द (Colic Pain) से इतना ज्यादा रोता है कि किसी भी तरह चुप नहीं होता। इसलिए समझदारी इसी में है कि आप अपने डॉक्टर से पहले ही पूछकर कोई अच्छी सी कोलिक पेन या गैस की सिरप घर पर रखें। डॉक्टर जितनी मात्रा (Dosage) बताएं, जरूरत पड़ने पर बच्चे को दे सकती हैं, जिससे उसे तुरंत राहत मिल जाए।
- घरवालों की मदद लेने में शर्म कैसी? अरे भई, अकेली ठेकेदार थोड़ी हैं आप! रात में या सुबह के वक्त अपने पार्टनर या घर के किसी और सदस्य को बोलिए कि “थोड़ी देर बच्चे को आप संभालो, मुझे सोने दो।” इसमें झिझकना बिल्कुल नहीं है।
- अपना खाना-पीना मत छोड़ो: बच्चे के चक्कर में खुद भूखी मत रहो। अपने पास पानी की बॉटल और कुछ हेल्दी स्नैक्स हमेशा रखो, ताकि शरीर में ताकत बनी रहे।
बस, आखिर में इतना ही कहूँगी…
देख यार, यह बच्चों के रोने वाला जो दौर है ना, यह कुछ दिनों का मेहमान है। थोड़े दिनों बाद बच्चा बड़ा हो जाएगा और यह रातें पीछे छूट जाएंगी। लेकिन इस चक्कर में अपनी सेहत मत बिगाड़ो।
यार रखना—आप खुश और स्वस्थ रहोगी, तभी तो अपने बच्चे का अच्छे से ख्याल रख पाओगी! अपना ध्यान रखो, आप बहुत स्ट्रॉन्ग हो।
छोटी सी सलाह: अगर बच्चा रातभर बहुत तेज़ दर्द से रोए और सिरप देने के बाद भी चुप न हो, तो बिना देर किए अपने डॉक्टर (Pediatrician) के पास जरूर जाएँ।
